झारखंड में सड़क पर बेसहारा घूमते, दुर्घटना में घायल या तस्करी के दौरान पकड़े गए गोवंश की देखभाल के लिए अब पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। झारखंड गौ सेवा आयोग की पहल पर राज्य के सभी 24 जिलों में 20-20 लाख रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। यानी हर जिले के पास गोवंश संरक्षण के लिए 20 लाख रुपये तुरंत उपलब्ध रहेंगे।
उपायुक्त करेंगे निगरानी
इस फंड की निगरानी संबंधित जिले के उपायुक्त (DC) करेंगे। जरूरत के हिसाब से इससे गोवंश के लिए तुरंत चारा, पानी, इलाज और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया जा सकेगा। अब तक गोवंश पकड़े जाने के बाद उनके भरण-पोषण के लिए अलग से राशि स्वीकृत होने का इंतजार करना पड़ता था, जिससे कई बार पशुओं को भूखा-प्यासा रहना पड़ता था।
17 साल बाद मिला समाधान
आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, गौ सेवा आयोग की स्थापना करीब 17 साल पहले हुई थी। लगातार प्रयासों के बाद अब जाकर सभी जिलों में यह व्यवस्था हो पाई है। उन्होंने कहा कि पहले फंड न होने से प्रशासन को पकड़े गए गोवंश की देखरेख में भारी परेशानी होती थी, अब आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सकेगी।
धनबाद में तस्करी बड़ी चुनौती
धनबाद जैसे जिलों के लिए यह फंड खास तौर पर अहम है, क्योंकि जीटी रोड के रास्ते गोवंश की तस्करी के मामले लगातार सामने आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त को एक कंटेनर से 48 गोवंश पकड़े गए, जिनमें चार मृत मिले। 23 और 28 अक्टूबर को मैथन टोल प्लाजा से क्रमशः 28 और 24 गोवंश तथा 29 अक्टूबर को 38 गोवंश पकड़े गए। कतरास की श्री गंगा गोशाला के अनुसार, बीते दो महीनों में अकेले उनकी गोशाला में 150 से ज्यादा गोवंश लाए गए।
- फंड: हर जिले में ₹20 लाख (कुल 24 जिले)
- निगरानी: जिला उपायुक्त
- उपयोग: चारा, पानी, इलाज, आपात देखभाल
- राज्य में निबंधित गौशालाएं: 23 (धनबाद में 2)
राज्य में कुल 23 निबंधित गौशालाएं हैं। धनबाद में झरिया की श्री झरिया धनबाद गोशाला और कतरास की श्री गंगा गोशाला में पकड़े गए गोवंश रखे जाते हैं। इस फंड से इन गौशालाओं पर बढ़ता बोझ भी कुछ कम होगा।